मनरेगा योजनाओं में भ्रष्टाचार का आरोप: कनीय अभियंता

मनरेगा योजनाओं में भ्रष्टाचार का आरोप: कनीय अभियंता मनोज कुमार पर लाभुकों से अवैध वसूली के गंभीर आरोप

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

चतरा : जिले के पत्थलगड़ा प्रखंड अंतर्गत महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत संचालित योजनाओं में गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के केंद्र में कनीय अभियंता (जेई) मनोज कुमार हैं, जिन पर लाभुकों से योजनाओं के एवज में अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप लगा है।
स्थानीय लाभुकों ने आरोप लगाया है कि जेई मनोज कुमार योजनाओं के एस्टीमेट तैयार करने और कार्य प्रारंभ कराने के लिए खुलेआम कमीशन की मांग करते हैं। लाभुकों का कहना है कि यदि कोई लाभार्थी पैसे देने में असमर्थ होता है, तो उसकी योजना को जानबूझकर रोक दिया जाता है।
बिना ‘प्रतिशत’ के नहीं बनता एस्टीमेट:
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, लाभुकों द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेज़ जमा किए जाने के बावजूद योजनाओं के एस्टीमेट तैयार नहीं किए जा रहे हैं। आरोप है कि मनोज कुमार बिना कमीशन (प्रतिशत) लिए किसी भी योजना को आगे नहीं बढ़ाते। कई लाभुकों ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि विभिन्न चरणों में रिश्वत की मांग की जाती है और पैसे न देने पर फाइलें लंबित कर दी जाती हैं। उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने को मजबूर किया जाता है। कुछ लाभुकों ने यह भी आरोप लगाया कि अभियंता द्वारा कहा जाता है, “हमारे द्वारा बनाए गए एस्टीमेट से ही आप सबको लाभ होता है, इसलिए पहले हमें हमारा हिस्सा देना अनिवार्य है।”
स्थानांतरण के बाद भी उठ रही आशंकाएँ:
हाल ही में मनोज कुमार का स्थानांतरण चतरा किया गया है। इससे स्थानीय लोगों में यह आशंका गहराने लगी है कि अब चतरा में भी इसी तरह की भ्रष्टाचार की घटनाएं सामने आ सकती हैं। जनमानस यह भी सवाल उठा रहा है कि क्या ऐसे अधिकारियों को विभागीय संरक्षण प्राप्त है? यदि नहीं, तो अब तक उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
मांग उठी निष्पक्ष जांच की:
इस पूरे प्रकरण को लेकर कई जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने चिंता प्रकट की है और मनोज कुमार द्वारा तैयार की गई समस्त योजनागत एस्टीमेट की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उप विकास आयुक्त अमरेंद्र कुमार सिन्हा और चतरा के उपायुक्त से इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।
प्रशासनिक कार्रवाई पर उठे सवाल:
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, हाल ही में उप विकास आयुक्त द्वारा मनोज कुमार (सहित अन्य) को स्पष्टीकरण देने हेतु नोटिस जारी किया गया है तथा ₹25,000 की राशि की वसूली का निर्देश भी दिया गया है। इसके बावजूद जनता में यह सवाल गूंज रहा है कि क्या मात्र स्पष्टीकरण और प्रतीकात्मक आर्थिक दंड से भ्रष्टाचार पर रोक लग सकती है? क्यों नहीं ऐसे अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय निलंबन अथवा सेवा से बर्खास्तगी जैसी कठोर कार्रवाई की जाती?
यह स्थिति न केवल प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना की विश्वसनीयता को भी आघात पहुंचाती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या दोषी अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या नहीं। जनता की निगाहें प्रशासन के आगामी निर्णय पर टिकी हुई हैं।