महान समाज सुधारक कवित्री और पहली बार शिक्षा का अलग जगाने वाली महिला थी सावित्रीबाई फुले: सुरेश कुमार
छतरपुर(पलामू)
छतरपुर: महान समाज सुधारक, कवित्री, भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जीवन संघर्ष से सभी महिलाओं सहित समाज के हर वर्ग के सभी लोगों को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। उक्त बातें छतरपुर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के भावी उम्मीदवार इंजीनियर सुरेश कुमार ने सावित्रीबाई फुले के पुण्यतिथि पर बताया। उन्होंने उनके जीवन संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सावित्रीबाई फुले न सिर्फ सामाजिक यातनाएं सही बल्कि जब महिलाओं को शिक्षित करने के पथ पर खुद को अग्रसर किया तो समाज के कुटिल विचारधारा के लोगों के द्वारा इनके ऊपर कचरा तक डाला जाता रहा। परंतु उन्होंने अपने फैसले पर अडिग रहा। लाख सामाजिक यातनाएं सहने के बावजूद उन्होंने महिलाओं को शिक्षित करने के लिए विद्यालय का स्थापना कर ही दिया। आज महिलाएं देश चला रही हैं या चांद तक की सफर कर रहे हैं तो इसका सबसे बड़ा श्रेय सावित्रीबाई को मिलनी चाहिए। जिस समय समाज में छुआछूत बाल विवाह सती प्रथा जैसी भयानक कुरीतियां व्याप्त थी, जिस समय समाज में महिलाओं को शिक्षा को एक अभिशाप माना जाता था, ऐसे मुश्किल समय में इन्होंने शिक्षा का अलग जगाया। इस अवसर पर उन्होंने नगर पंचायत क्षेत्र के तमाम अध्यनरत बच्चे बच्चियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में भी रहकर शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थियों से सही इन्होंने अपील किया कि सावित्रीबाई के जीवन संघर्षों से प्रेरणा लेकर आगे बढ़े पढ़ाई के लिए बहाना नहीं विकल्प ढूंढिए।
