मेदिनीनगर महापौर चुनाव: रिंकु सिंह ने अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर सुरक्षा सख्त करने की मांग की
मेदिनीनगर नगर निगम चुनाव: महापौर प्रत्याशी श्रीमती रिंकु सिंह ने अति संवेदनशील मतदान केंद्रों पर सुरक्षा की मांग की
मेदिनीनगर (पलामू): आगामी नगर निगम चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी के बीच महापौर पद की प्रत्याशी रिंकु सिंह ने चुनाव आयोग भारत , राज्य निर्वाचन आयोग झारखंड और जिला प्रशासन को पत्र लिखकर सुरक्षा व्यवस्था सख्त करने की अपील की है। उन्होंने विशेष रूप से उन मतदान केंद्रों को चिह्नित किया है जहाँ पिछले चुनावों में विवाद की घटनाएं होती रही हैं।
मुख्य बिंदु:
रिंकु सिंह (पति- श्री राकेश कुमार सिंह, हमीदगंज निवासी) मेदिनीनगर नगर निगम से महापौर पद की प्रत्याशी हैं।
उन्होंने निर्वाचन पदाधिकारी को पत्र लिखकर बताया कि कई केंद्रों पर संवेदनशील होते रहे हैं।
प्रत्याशी ने मांग की है कि सभी केंद्रों पर सी.सी.टी.वी. कैमरा लगाया जाए और कड़ी सुरक्षा दी जाए ताकि मतदान “स्वतंत्र एवं निर्भीक” हो सके।
इस पत्र की प्रतिलिपि उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पदाधिकारी को भी भेजी गई है।
चिह्नित किए गए प्रमुख संवेदनशील मतदान केंद्र (सूची):
केंद्र 18, 19, 20: उत्क्रमित मध्य विद्यालय (पोखराहा एवं बहलोलवा)
केंद्र 23, 24: राजकीयकृत नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, कचरवा
केंद्र 39, 40, 41: भीष्मनारायण इण्टर महाविद्यालय
केंद्र 42: बालिका मध्य विद्यालय, हमीदगंज
केंद्र 59: विद्युत कार्यालय भवन, आबादगंज
केंद्र 72, 73: रविदास भवन, नदी किनारे
केंद्र 74, 75, 76: सुमित्रा औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र, बेलवाटिकर
केंद्र 77, 78: मध्य विद्यालय नावाटोली
केंद्र 84, 85: अबकारी शराब भंडार एवं सामुदायिक भवन, स्टेशन रोड
केंद्र 86, 87, 88: जिला मत्स्य कार्यालय, नई मुहल्ला
केंद्र 104, 105: राजकीय बालक मध्य विद्यालय, हमीदगंज
प्रशासनिक अपडेट:
प्रत्याशी द्वारा यह आवेदन 14 फरवरी 2026 को डाक (Speed Post) के माध्यम से निर्वाचन आयोग को भेजा गया है।
श्रीमती रिंकू सिंह ने कहा:
”हमारा उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि मेदिनीनगर का हर मतदाता बिना किसी डर या दबाव के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके। निष्पक्ष चुनाव ही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। मैंने प्रशासन से मांग की है कि तकनीक और सुरक्षा के माध्यम से मतदान कराई जाए।
श्रीमती सिंह के इस कदम की प्रबुद्ध जनों और आम मतदाताओं के बीच काफी चर्चा हो रही है, क्योंकि यह सीधे तौर पर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा मामला है।

