JTET नियमावली पर पलामू में आक्रोश, मगही-भोजपुरी को शामिल करने की मांग तेज
पालामू प्रमंडल के युवाओं के साथ धोखाधड़ी :
JTET परीक्षा में मगही-भोजपुरी को क्षेत्रीय भाषा में शामिल न करने पर आंदोलन की चेतावनी
रांची/पलामू, 1 अप्रैल 2026 — झारखंड सरकार द्वारा JTET परीक्षा की प्रस्तावित नियमावली में पलामू प्रमंडल के लिए मगही और भोजपुरी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल न करने को लेकर स्थानीय युवाओं और जनता में गहरा आक्रोश फैल गया है। सामाजिक कार्यकर्ता आशिष कुमार सिन्हा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर सरकार को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही मगही और भोजपुरी को शामिल नहीं किया गया तो पलामू प्रमंडल के युवा उग्र आंदोलन पर उतर आएंगे।
आशिष कुमार सिन्हा ने कहा कि झारखंड सरकार की अधिसूचना संख्या 8 वि 1=4/2016/487 दिनांक 23 मार्च 2026 के माध्यम से जारी प्रस्तावित नियमावली में पलामू प्रमंडल से मगही एवं भोजपुरी भाषा को हटा दिया गया है। इनके स्थान पर नागपुरी और कुड़ुख भाषा को शामिल कर दिया गया है। जबकि पलामू प्रमंडल के अधिकांश क्षेत्रों में मगही और भोजपुरी ही मुख्य बोलचाल की भाषा है।
सिन्हा ने आरोप लगाया, “यह पलामू प्रमंडल के युवाओं के साथ साफ धोखाधड़ी है। मगही-भोजपुरी हट जाने से यहां की वर्तमान पीढ़ी बुरी तरह प्रभावित होगी। सरकार गुंगी-बहरी हो गई है। यहां के बच्चों और बच्चियों के साथ खुला अन्याय हो रहा है। जनप्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “अब समय आ गया है कि सड़क से सदन तक जन आंदोलन छेड़ा जाए। यदि झारखंड सरकार ने तुरंत मगही और भोजपुरी को क्षेत्रीय भाषा में शामिल नहीं किया तो पलामू प्रमंडल के सभी युवा और जनता सड़क पर उतर आएगी।”
सामाजिक कार्यकर्ता आशिष कुमार सिन्हा, सतबरवा, पलामू (झारखंड) ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यह मुद्दा स्थानीय भाषा-संस्कृति और युवाओं के भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
यह मामला अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बन गया है। स्थानीय स्तर पर युवा संगठन और भाषाई कार्यकर्ता इस अधिसूचना के खिलाफ एकजुट होने की तैयारी में जुट गए हैं।

