इंटरनेशनल कराटे प्रतियोगिता का समापन पुरस्कार वितरण के साथ संपन्न हुआ

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इंटरनेशनल कराटे प्रतियोगिता का समापन पुरस्कार वितरण के साथ संपन्न हुआ

गिरिडीह:- गिरिडीह नगर भवन में चल रहे इंटरनेशनल कराटे प्रतियोगिता का समापन आज पुरस्कार वितरण के साथ हो गया। दो दिनों तक हुए इस प्रतियोगिा में भारत के अलावा भूटान, नेपाल व बंगलादेश के लगभग 350 प्रतिभागियों ने प्रतिभा दिखाई। प्रतियोगिता में पश्चिम बंगाल की टीम ओवरऑल चैंपियन बनी। वहीं आसाम दूसरे व झारखंड की टीम तीसरे स्थान पर रही। प्रतियोगिता में भूटान, नेपाल व बंगलादेश के खिलाडि़यों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया।
ओवरऑल चैंपियन बनी पश्चिम बंगाल के खिलाड़ियों ने 52 गोल्ड, 41 सिल्वर व 36 ब्रॉज मेडल जीता। दूसरे स्थान पर रही आसाम की टीम ने 30 गोल्ड, 25 सिल्वर व 40 ब्रॉज मेडल जीता। तीसरे स्थान पर रहे झारखंड की टीम ने 12 गोल्ड, 14 सिल्वर व 30 ब्रॉज मेडल अपने नाम किया। प्रतियोगिता बालक व बालिका वर्ग के चार कैटेगरी में आयोजित थी। जिसमें सब जूनियर (अंडर-14), कैडेट (15 से 18 साल), जूनियर (18 से 20 साल) एवं सीनियर (20 साल से अधिक) कैटेगरी शामिल था। प्रतियोगिता में दो तरह के इवेंट काता व कुमिते हुए। पहले दिन सब जूनियर में काता की प्रतियोगिता हुई। वहीं दूसरे दिन कुमिते इवेंट की प्रतियोगिता हुई। रविवार सुबह में झंडा मैदान से प्रतिभागियों ने मार्च पास्ट निकाला। खिलाड़ी अपने-अपने टीम के फ्लैक्स हाथों में लेकर निकले व नगर भ्रमण किया। इसके बाद आयोजन स्थल नगर भवन पहुंचे।
खिलाड़ियों को पुरस्कार देकर किया सम्मानित
रविवार शाम को समापन के बाद खिलाड़ियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कराटे इंडिया के चीफ हसन मोहम्मद इस्माइल, पूर्व आईजी लक्ष्मण प्रसाद सिंह, श्रवण केडिया, गिरिडीह कराटे संघ के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह, आयोजक विजय सिंह, जोरावर सिंह सलूजा, ऋषि सलूजा, सेंसई उज्जवल सिंह आदि ने खिलाड़ियों को ट्रॉफी, मेडल व मोंमेटो देकर सम्मानित किया।
इन्होने निभाई निर्णायक की भूमिका
दो दिनों तक हुए प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका श्याम के हरी, जीतू पुरुस्टी, शहबाज हुसैन, अमित महतो, मानस कुमार नाथ समेत अन्य का योगदान रहा। प्रतियोगिता का सफल बनाने में कपूर सिंह मॉडर्न मार्शल आर्ट एकेडमी गिरिडीह, वर्ल्ड फूनाकोशी शोतोकन कराटे आर्गेनाइजेशन झारखंड, उद्योगपति डॉ अमरजीत सिंह सलूजा, विजय सिंह, संघ के संरक्षक चुन्नूकांत आदि का योगदान रहा।

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