एम.के. डी.ए.वी. में मनाई गई महात्मा एन.डी. ग्रोवर की पुण्यतिथि

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एम.के. डी.ए.वी. में मनाई गई महात्मा एन.डी. ग्रोवर की पुण्यतिथि ।
6 फरवरी 2024 को एम.के. डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल मेदिनीनगर पलामू में कर्मयोगी, शिक्षाविद, डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल्स बिहार , झारखंड, उड़ीसा क्षेत्र के पूर्व निदेशक महात्मा नारायण दास ग्रोवर की पुण्यतिथि मनाई गई । कार्यक्रम में सर्वप्रथम विद्यालय के प्राचार्य सह डी.ए.वी पब्लिक स्कूल्स झारखंड जोन आई, के सहायक क्षेत्रीय अधिकारी डॉक्टर . एन. खान ने ग्रोवर साहब के चित्र पर पुष्पार्चन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके साथ-साथ विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित किया। इस अवसर पर छात्रों को संबोधित करते हुए सहायक क्षेत्रीय अधिकारी डॉक्टर जी.एन.खान ने ग्रोवर साहब की सादगी एवं डी.ए.वी के प्रति समर्पण भावना की विस्तृत चर्चा की। उन्होंने बताया कि किस तरह ग्रोवर साहब ने बिहार, झारखंड, उड़ीसा में एक-एक विद्यालय को खड़ा करने हेतु परिश्रम किया।
उड़ीसा के चक्रवात एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं में डी.ए.वी के छात्रों के माध्यम से लोगों की सेवा एवं सहायता की। आदिवासी बच्चों की चिंता एवं सेवा भाव की चर्चा करते हुए उनकी अंतिम इच्छा बताई कि उन्होंने अपने निधन पर स्कूल बंद न करने की इच्छा व्यक्त की थी। इस प्रकार डॉक्टर खान ग्रोवर साहब के जीवन से जुड़े अनेक संस्मरण सुनाते हुए भावुक हो गए। प्राचार्य जी ने बताया कि 15 नवंबर 1923 को पंजाब के ईशाखेल में ग्रोवर साहब का जन्म हुआ । वे अबोहर विश्वविद्यालय में रसायन शास्त्र के प्रवक्ता नियुक्त हुए किंतु समाज सेवा की लगन उन्हें बिहार ले आई और पचासी वर्षों तक पिछड़े आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा का अलग जागते हुए 6 फरवरी 2008 को इस दुनिया से चले गए । इन क्षेत्रों में 250 से अधिक विद्यालयों की स्थापना कर ग्रोवर साहब ने शैक्षिक क्रांति लाने का प्रयास किया । उनका मानना था कि शिक्षा से ही सामाजिक कुरीतियों , अंधविश्वास जैसी बुराइयों का अंत हो सकता है । उन्होंने अपने अंतिम समय में ईश्वर से प्रार्थना करते हुए कहा था कि , ” हे ईश्वर ! आपने मुझे इस खूबसूरत दुनिया में भेजा था मैं आज उसमें कुछ चमकते सितारे जोड़कर जा रहा हूं ” । उनका संकेत डी . ए . वी संस्थाओं की ओर था । उन्हें बच्चे बहुत प्रिय थे । वे बच्चों से संवाद करते हुए कहते थे कि “बच्चों अपने मां-बाप से कहना कि मेरी परवरिश आप ईमानदारी की कमाई से करें । पाप और बेईमानी की कमाई मेरा जीवन बर्बाद कर देगी । ” उनके योगदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत महात्मा की उपाधि दी गई । हम उन्हें प्यार से झोले वाले बाबा के रूप में याद करते हैं । मैं उन्हें शत-शत नमन करता हूं।
कार्यक्रम के अंत में कक्षा नवम एवं एकादश के छात्रों के साथ हवन किया गया, जिसमें शिक्षक श्री आलोक कुमार,श्री सी.एस. पांडे,श्री एस. के. पांडे, श्री तुषार घोष, श्री सुमन चौबे एवं सुश्री सुदेशना राय उपस्थित थी। हवन कर्ता श्री अरविंद कुमार एवं कार्यक्रम संयोजक शिक्षक श्री कन्हैया राय थे।

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