आदिवासियों के साथ प्रशासन की बर्बर कार्रवाई निंदनीय : झामुमो
आदिवासियों के साथ प्रशासन की बर्बर कार्रवाई निंदनीय : झामुमो
दोषियों के विरूद्ध हो कड़ी कार्रवाई, नहीं तो होगा आंदोलन
गढ़वा। जिले के आदिवासी बहुल रंका प्रखंड के विश्रामपुर पंचायत में मंडल डैम के विस्थापितों को बसाने के नाम पर ग्रामीण जनता के साथ की गई बर्बरतापूर्ण कार्रवाई सरासर गलत है। इस घटना की झामुमो रंका प्रखंड इकाई ने कड़ी निंदा की है।
इस संबंध में झामुमो के रंका प्रखंड अध्यक्ष जैनुल्लाह अंसारी ने कहा है कि विस्थापितों को बसाने के नाम पर जिला एवं पुलिस प्रशासन द्वारा ग्रामीणों के साथ बहुत ही बर्बर कार्रवाई की गई है। झामुमो इस घटना की कड़ी निंदा करता है साथ ही राज्य सरकार से दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है। झामुमो नेताओं ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा जल, जंगल व जमीन से जुड़ी पार्टी है। यह पार्टी हमेशा गरीब एवं आदिवासियों के हित की लड़ाई लड़ती है। आज हेमंत सोरेन के ही शासनकाल में गरीबों एवं आदिवासियों पर की गई प्रशासन की इस कायराना हरकत की जितनी भी निंदा की जाय वह कम है। उन्होंने कहा कि विश्रामपुर की इस घटना से राज्य सरकार को अवगत कराया जाएगा। साथ ही झामुमो ने दोषी लोगों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। यदि दोषी प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो झामुमो इसके लिए चुप नहीं बैठेगा इस मामले को लेकर सड़क से सदन तक जोरदार आंदोलन होगा।
प्रखंड अध्यक्ष ने कहा है कि गढ़वा जिले में मंडल डैम परियोजना को लेकर रंका प्रखंड के विश्रामपुर पंचायत में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान कथित पुलिस बल प्रयोग का मामला सामने आया है। जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बताया जाता है कि मंडल डैम परियोजना के विस्थापितों को बसाने की प्रक्रिया को लेकर प्रशासनिक टीम गांव पहुंची थी। इसी दौरान गांव के लोगों ने अपनी जमीन, पुनर्वास और मुआवजे से जुड़े सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी बात सुनने के बजाय प्रशासन और पुलिस ने सख्ती बरती और स्थिति को नियंत्रित करने के नाम पर बल प्रयोग किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि विरोध कर रहे लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई महिलाएं और पुरुष घायल हो गए। घटना के बाद सामने आई तस्वीरों में कुछ लोगों के शरीर पर चोट के निशान दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई ग्रामीणों को गंभीर चोटें भी आई हैं। इस घटना के बाद गांव में भय और तनाव का माहौल बन गया है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने विस्थापन से पहले पुनर्वास की ठोस व्यवस्था, मुआवजा और बुनियादी सुविधाओं के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी। उनका कहना है कि जब तक प्रभावित परिवारों के लिए उचित पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं होती, तब तक वे अपने गांव और जमीन को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों व पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही विस्थापित परिवारों के लिए सम्मानजनक पुनर्वास नीति लागू करने की भी मांग उठाई गई है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इस घटना को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और ग्रामीण न्याय तथा उचित पुनर्वास की मांग को लेकर डटे हुए हैं।




