काशी में 3 से 5 नवंबर तक सजेगी संस्कृति संसद, ‘जेन जी कॉन्क्लेव’ में युवाओं से संवाद करेंगे साधु-संत और विद्वान

जैन जी के भटकाव को दूर करने का रास्ता बताएंगे*

तीन से पांच नवंबर तक युवाओं के मन की बात सुनकर उनका मार्गदर्शन करेंगे साधु-महात्मा और विद्वजन

वाराणसी : जैन जी के भटकाव को दूर करने और उनके मन की बात को मन समझकर साधु-महात्मा और विद्वजन उनका मार्गदर्शन करेंगे। युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने, भारतीय ज्ञान परंपरा, ग्राम्य संस्कृति और राष्ट्रधर्म का भाव जागृत करने के लिए धर्म नगरी काशी में तीन से पांच नवंबर तक देश भर के साधु-संत और विद्वान जुटेंगे। ‘संस्कृति संसद 2026’ में इस वर्ष मुख्य आकर्षण ‘जैन जी कान्क्लेव’ होगा, इसमें संत और विद्वानों नई पीढ़ी से सीधा संवाद कर उनकी जिज्ञासा शांत करेंगे और नव भारत के निर्माण में उनकी भूमिका बताएंगे।

गंगा महासंघ की ओर से आयोजित संस्कृति संसद को लेकर अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि आधुनिक जीवनशैली और डिजिटल युग में युवा पीढ़ी कई मानसिक द्वंद्व और भटकाव से जूझ रही है। ऐसे में युवाओं के मन की बात सुनकर उनकी जिज्ञासाओं, तार्किक प्रश्नों और समकालीन संकायों का समाधान वैज्ञानिक व आध्यात्मिक परिप्रेक्ष्य में दिया जाएगा। जैन जी कान्क्लेव में 90 प्रतिशत भागीदारी युवाओं की होगी।

हार्टिक पटेल जैसे कई युवा नेता भी जैन जी से संवाद करेंगे। बताया कि भारतीय संस्कृति केवल शरीर के रूप में सहेजने की वस्तु नहीं है, बल्कि इसे आधुनिक विज्ञान, ज्ञान और नई पीढ़ी के दैनिक जीवन से जोड़ना समय की मांग है। इस महामंथन का केंद्रीय उद्देश्य युवाओं में संस्कारों के बीज अंकुरित करना है।

अखिल भारतीय संत समिति के अध्यक्ष जगद्गुरु स्वामी अखिलेश्वर देवाचार्य महाराज व संयुक्त मंत्री राधे बाबा भी मौजूद रहेंगे।

काशी में आयोजित संस्कृति संसद-2026 में जुटेंगे देशभर के 3000 से ज्यादा साधु-संत

जैन जी कान्क्लेव में 90 प्रतिशत युवाओं की सहभागिता होगा मुख्य आकर्षण

संस्कृतिक प्रस्तुतियों में दिखेगी संस्कृति-संस्कार की झलक

संस्कृति संसद के तहत प्रतिदिन सुबह 10 से शाम चार बजे तक मुख्य कार्यक्रम तय आयोजित होंगे। वहीं, पैरासैनिक व रचनात्मक गतिविधियां भी होंगी। इसमें बच्चों की चित्रकला व रंगोली प्रतियोगिता और शाम को राष्ट्र, धर्म, संस्कृति और संस्कार पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होंगी।

कान्क्लेव के लिए 7000 युवाओं ने कराया रजिस्ट्रेशन

जैन जी कान्क्लेव में शामिल होने के लिए देश भर से युवा पंजीकरण करा रहे हैं। काशी विद्वत परिषद के महामंत्री प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि लगभग 7000 युवाओं ने पंजीकरण कराया है।

राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि वर्तमान में बाजार में उपलब्ध मनुस्मृति का स्वरूप मनगढ़ंत, भ्रामक और असत्य है। भारत से प्राचीन पांडुलिपियां चोरी हो गईं और अध्ययन से पता चला कि जर्मनी, चीन, कनाडा और फ्रांस के संग्रहालयों में वह पांडुलिपियां विखरी हैं। इसे वापस लाने पर विद्वान से चर्चा की जाएगी। संस्कृति संसद में शामिल होने के बाद साधु-संतों का आगमन आज होगा। सोमवार को दोपहर तीन बजे से श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित महालक्ष्मीयविवेक में साधु-संत हिस्सा लेंगे।

पीएम ने भेजी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘संस्कृति संसद 2026’ के आयोजन को लेकर शुभकामनाएं दी हैं। अपने संदेश में उन्होंने कहा कि काशी युगीन से भारत की आध्यात्मिक चेतना, ज्ञान परंपरा और संवाद का प्रमुख केंद्र रही है। इस संसद में विशेष रूप से ‘राष्ट्रीय युवा हिमालय’ और युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया गया है, जो प्राचीन परंपरा और युवा ऊर्जा के बीच संवाद स्थापित कर विकसित भारत के निर्माण में सहायक होगा।

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