गिरिडीह गुरुद्वारे में गुरु रामदास जी का 492वां प्रकाश पर्व श्रद्धा से संपन्न, कीर्तन और लंगर में उमड़ी संगत
विनम्रता और सेवा के प्रतीक गुरु रामदास जी का 492वां प्रकाश पर्व श्रद्धा के साथ संपन्न, कीर्तन और लंगर में उमड़े श्रद्धालु!
गिरिडीह स्टेशन रोड स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में सिखों के चौथे गुरु, धन-धन श्री गुरु रामदास जी महाराज का 492वां प्रकाश पर्व बड़े श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर गुरुद्वारा परिसर गुरु की वाणी और भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। विशेष कीर्तन, अरदास और गुरु के अटूट लंगर के माध्यम से संगत ने गुरु महाराज के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।
गुरुवाणी से भक्तिमय हुआ गुरुद्वारा परिसर
प्रकाश पर्व के अवसर पर स्थानीय रागी जत्थे ने गुरु की महिमा का गुणगान करते हुए कई मनमोहक शबद-कीर्तन प्रस्तुत किए। ‘जिन गुर का भाणा मंनिआ तिन घुमि घुमि जाए’ और ‘गुरु रामदास राखो शरणाई’ सहित अन्य गुरुवाणी के शबदों से पूरा गुरुद्वारा परिसर भक्तिमय हो उठा। लगभग दो घंटे तक चले विशेष कीर्तन में श्रद्धालु भक्ति में लीन रहे। इसके बाद विधिवत अरदास की गई और संगत के बीच गुरु का अटूट लंगर वितरित किया गया।
विनम्रता, सेवा और प्रभु भक्ति का दिया संदेश
इस अवसर पर गुरु रामदास जी महाराज के जीवन और सिख समाज में उनके अमूल्य योगदान को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि गुरु रामदास जी को सिख इतिहास के महान निर्माताओं में गिना जाता है। उन्होंने सिख पंथ को संगठित करने, अमृतसर के विकास और सिख समुदाय की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी वाणी में विनम्रता, सेवा, प्रेम और गृहस्थ जीवन में रहते हुए प्रभु की भक्ति करने का विशेष संदेश मिलता है।
सिख समाज के लोगों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा
प्रकाश पर्व के आयोजन में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान सेवादार सरदार गुणवनत सिंह मोंगिया, सचिव नरेंद्र सिंह शम्मी, परमजीत सिंह कल्लू, देवेंद्र सिंह खालसा, सुधीर आनंद, राजेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह बग्गा, राजू चावला, भूपेंद्र सिंह और बॉबी सलूजा समेत सिख परिवारों के अनेक सदस्य एवं गणमान्य लोग शामिल हुए।
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, सेवा और भाईचारे का संदेश देखने को मिला। गुरु के अटूट लंगर ने संगत के बीच समानता और सेवा की भावना को और मजबूत किया।

