तालाब, कुआं और नालों का अस्तित्व हो रहा गायब, माले ने उठाया मुद्दा : राजेश सिन्हा
तालाब, कुआं और नालों का अस्तित्व हो रहा गायब, माले ने उठाया मुद्दा : राजेश सिन्हा
गिरिडीह: शहर में तालाब, कुआं, नाला समेत पारंपरिक जल स्रोतों के लगातार गायब होने और अतिक्रमण का मुद्दा भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने उठाया है। उन्होंने कहा कि नगर पालिका के दौर में शहर में करीब सौ कुएं हुआ करते थे। आज इनमें से अधिकांश या तो अतिक्रमण की भेंट चढ़ गए, उनके ऊपर मकान व धार्मिक स्थल बना दिए गए या फिर कुओं में कचरा भरकर उनका अस्तित्व ही मिटा दिया गया। राजेश सिन्हा ने कहा कि आज भी शहर के विभिन्न इलाकों में दर्जनों पुराने कुएं मौजूद हैं, जिन्हें चिन्हित कर पुनः उनकी मूल स्थिति में लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वार्ड पार्षद को अपने क्षेत्र में ऐसे जल स्रोतों को चिन्हित कर उनके संरक्षण के लिए पहल करनी चाहिए। उन्होंने नालों के अतिक्रमण पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वास्तु विहार के पास, शास्त्री नगर समेत शहर के कई इलाकों में नालों का अस्तित्व लगभग समाप्त हो चुका है। इसी तरह कई तालाबों पर बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी होने की शिकायत है, जिसकी जांच आवश्यक है। मानसरोवर तालाब की स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वहां पूजा के समय सफाई होती है, लेकिन इसके बाद पूरे साल उपेक्षा बनी रहती है। राजेश सिन्हा ने कहा कि एक समय कुओं के पानी का इस्तेमाल लोग पीने के लिए करते थे और होटल समेत अन्य जगहों पर भी कुएं का पानी उपयोग में आता था। आज कई कुएं कचरे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जल स्रोतों के संरक्षण के लिए प्रशासनिक स्तर पर गंभीर पहल जरूरी है। उन्होंने बताया कि इस मुद्दे को लेकर जल्द ही गिरिडीह उपायुक्त से मुलाकात कर लिखित आवेदन दिया जाएगा। इसके अलावा मेयर, डिप्टी मेयर, नगर आयुक्त, जल संसाधन मंत्री सहित मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भी आवेदन भेजा जाएगा। राजेश सिन्हा ने कहा कि शहर के लगभग हर मोहल्ले में कभी दो-तीन कुएं हुआ करते थे। अब जरूरत है कि उन पुराने जल स्रोतों को खोजकर उनका अस्तित्व वापस लाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि पुराने कुओं में फिर से पानी उपलब्ध हो सके तो इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और शहर में जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल होगी।

