झामुमो ने सतबसवा प्रखंड कार्यालय पर एक दिवसीय धरना दिया
झामुमो ने सतबसवा प्रखंड कार्यालय पर एक दिवसीय धरना दिया*
खान एवं खनिज संशोधन अधिनियम 2026 (एमएमडीआर) के विरोध में
राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा, राज्य के अधिकारों की रक्षा और संशोधन वापस लेने की मांग
सतबसवा | खान एवं खनिज संशोधन अधिनियम 2026 (एमएमडीआर) के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने शनिवार को सतबसवा प्रखंड कार्यालय परिसर में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन आयोजित किया। धरना के बाद पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के नाम से ज्ञापन प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) को सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य की खनिज संपदा और उससे प्राप्त राजस्व पर राज्य के अधिकार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मिनरल्स बेयरिंग लैंड सेस से राज्य की आय वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1,379 करोड़ रुपये थी, जो 2025-26 में बढ़कर 7,488 करोड़ रुपये हो गई। 2026-27 में इस मद से 13,215 करोड़ रुपये आने का अनुमान है। झामुमो का तर्क है कि यह राजस्व राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं का मुख्य आधार है।
ज्ञापन में झारखंड की खनिज संपदा का कुल मूल्य लगभग 1.36 लाख करोड़ रुपये बताते हुए कहा गया कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान देने वाले झारखंड को स्थानीय विकास और रोजगार में उचित अधिकार मिलना चाहिए। पार्टी ने 25 जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले तथा एमएमडीआर एक्ट की धारा 9 का उल्लेख करते हुए मिनरल्स बेयरिंग लैंड सेस और खनिज राजस्व पर राज्य के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग की।
धरना की अध्यक्षता झारखंड मुक्ति मोर्चा के सतबसवा प्रखंड अध्यक्ष मेघनाथ राम ने की। इस अवसर पर केंद्रीय कार्य समिति सदस्य हाजी शमीम अहमद उर्फ ललन, पलामू जिला सह-सचिव श्रवण कुमार, मोइनुद्दीन खान, रामनाथ चंदवंशी, बृजमोहन सिंह, मंसूर आलम, संतु सिंह सहित सैकड़ों कार्यकर्ता, पदाधिकारी और ग्रामीण मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए गए और संशोधन वापस लेने की मांग की गई।
मुख्य मांगें
- राज्य की खनिज संपदा और उससे मिलने वाले राजस्व पर राज्य का अधिकार सुनिश्चित किया जाए।
- एमएमडीआर एक्ट की धारा 9 के तहत राज्य के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए।
- 25 जुलाई 2024 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन हो।
- खनिज राजस्व और मिनरल्स बेयरिंग लैंड सेस पर राज्य को प्राथमिकता दी जाए।
- संशोधन को तत्काल वापस लिया जाए।
प्रखंड अध्यक्ष मेघनाथ राम ने कहा, “यह राजस्व राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं का मुख्य आधार है। केंद्र सरकार खनिज संपदा पर राज्य के अधिकार को कमजोर नहीं कर सकती। हम इसका विरोध करते हैं और संशोधन वापस लेने की मांग करते हैं।”

