पलामू शिक्षा विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग में घूसखोरी का आरोप, भाकपा ने दी तालाबंदी की चेतावनी

शिक्षा विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग में घूसखोरी का आरोप, सीपीआई ने डीसी से जांच की मांग; कार्रवाई नहीं हुई तो तालाबंदी की चेतावनी

मेदिनीनगर ,पलामू:भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के जिला सचिव एवं डालटनगंज विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक प्रत्याशी रूचिर कुमार तिवारी ने पलामू के उपायुक्त को पत्र सौंपकर जिला शिक्षा विभाग में व्यापक भ्रष्टाचार, ट्रांसफर-पोस्टिंग में कथित पैसे के खेल और शिक्षकों के शोषण का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
रूचिर कुमार तिवारी ने आरोप लगाया कि जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा सहायक शिक्षकों के स्थानांतरण में निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालन नहीं किया जा रहा है। उनके अनुसार, मनमाने तरीके से ट्रांसफर-पोस्टिंग की जा रही है और प्रत्येक शिक्षक से 70 से 80 हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। जो शिक्षक पैसे देने में असमर्थ हैं, उन्हें दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में पदस्थापित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पलामू से सटे गढ़वा और लातेहार जिलों में दिव्यांग एवं महिला शिक्षकों को एसओपी के अनुरूप सुविधाजनक स्थानों पर पदस्थापित किया गया है, जबकि पलामू में नियमों की अनदेखी कर कथित रूप से धन उगाही का खेल चल रहा है। उन्होंने जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप कुमार, कुछ लिपिकों तथा विभाग में कार्यरत कुछ कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
भाकपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व उपायुक्त एस. समीरा के कार्यकाल में भ्रष्टाचार पर काफी हद तक रोक लगी थी, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद कथित तौर पर फिर से घूसखोरी का सिलसिला शुरू हो गया है। उन्होंने एक महिला शिक्षक का उदाहरण देते हुए दावा किया कि गर्भावस्था के दौरान छुट्टी स्वीकृत करने के लिए पैसे की मांग की गई, जिसके कारण समय पर अवकाश नहीं मिलने से उसके नवजात की मृत्यु हो गई तथा महिला की स्थिति भी गंभीर हो गई। उन्होंने इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
रूचिर कुमार तिवारी ने उपायुक्त से शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की स्वयं जांच कराने, तीन वर्षों से एक ही स्थान पर जमे लिपिकों एवं कर्मचारियों का स्थानांतरण करने तथा शहरों में छात्र-शिक्षक अनुपात का आकलन कर अतिरिक्त शिक्षकों को ग्रामीण विद्यालयों में पदस्थापित करने की मांग की है, ताकि गांवों में शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हो सके।उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन करेगी और कार्यालय में तालाबंदी आंदोलन शुरू किया जाएगा।