पलामू में मातृत्व अवकाश को लेकर गंभीर आरोप, गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद उठे सवाल

पलामू जिले के शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, चैनपुर में कार्यरत प्लस-टू शिक्षिका भारती पांडे के गर्भस्थ शिशु की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई। इस घटना के बाद शिक्षिका के पति मुकेश कुमार तिवारी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

मुकेश कुमार तिवारी हजारीबाग जिला पुलिस में कार्यरत हैं। उनके अनुसार उनकी पत्नी नौ माह की गर्भवती थीं और चिकित्सकों ने 4 अगस्त को संभावित प्रसव तिथि बताई थी। उन्होंने दावा किया कि 3 जुलाई को जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन समय पर अवकाश स्वीकृत नहीं किया गया।

पति का आरोप है कि मातृत्व अवकाश की स्वीकृति के लिए लगातार टालमटोल की गई और रिश्वत की मांग भी की गई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।

मुकेश तिवारी का कहना है कि मामले को लेकर वे शिक्षक संघ के पदाधिकारियों अजय मेहता, रिंकू गुप्ता और सतीश द्विवेदी के साथ पलामू उपायुक्त से भी मिले थे। उनके मुताबिक उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को मामले का तत्काल निष्पादन करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

पति के अनुसार छुट्टी नहीं मिलने के कारण गर्भावस्था के अंतिम दिनों में भी भारती पांडे को प्रतिदिन करीब 35 किलोमीटर की यात्रा कर विद्यालय आना-जाना पड़ रहा था।

इसी बीच उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। पति के मुताबिक अल्ट्रासाउंड जांच के बाद चिकित्सकों ने बताया कि गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो चुकी है।

इस दुखद घटना के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या शिक्षिका के मातृत्व अवकाश के आवेदन पर समय रहते कार्रवाई की गई थी? क्या वास्तव में अवकाश के बदले रिश्वत की मांग हुई थी? और यदि उपायुक्त ने तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया था, तो आवेदन का निष्पादन क्यों नहीं हुआ?

अब जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और संबंधित विभाग भी अपना पक्ष सार्वजनिक करे। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस मामले में किस स्तर पर क्या लापरवाही हुई।