रांची में पहली बार -18 पावर टॉरिक लेंस, मरीज की लौटी रोशनी

मीनाक्षी नेत्रालय में चिकित्सा का नया कीर्तिमान: -18 पावर का कस्टमाइज्ड स्मार्ट टॉरिक लेंस लगाकर झारखंड के पहले सफल केस ने रांचीवासी की जिंदगी रोशन कर दी*

रांची, 25 जून 2026: झारखंड की राजधानी रांची में स्थित मीनाक्षी नेत्रालय ने एक बार फिर नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। यहां के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक ने अत्यंत जटिल नेत्र शल्यक्रिया कर एक मरीज की लगभग खो चुकी दृष्टि को सफलतापूर्वक बहाल कर दिया। यह ऑपरेशन झारखंड के किसी भी आई अस्पताल में अब तक नहीं हुआ था।

रांची के रहने वाले श्री सुरेश कुमार बांका लंबे समय से गंभीर आंख की समस्या से जूझ रहे थे। उनकी आंख में बेहद ज्यादा सिलिंडर पावर (-18) के साथ-साथ मोतियाबिंद (Cataract) भी विकसित हो गया था। स्थानीय स्तर पर कई प्रसिद्ध डॉक्टरों ने इलाज से इनकार कर दिया था या फिर सफलता की कोई गारंटी नहीं दी थी। ऐसे में मरीज और उनके परिवार की उम्मीदें लगभग समाप्त हो चुकी थीं।

डॉक्टर अभिषेक का चमत्कारिक प्रयास

मीनाक्षी नेत्रालय पहुंचने पर डॉ. अभिषेक ने विस्तृत जांच के बाद केस को चुनौतीपूर्ण लेकिन संभव माना। उन्होंने अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए कस्टमाइज्ड स्मार्ट टॉरिक लेंस (-18 पावर) लगाने का फैसला लिया। यह लेंस विशेष रूप से मरीज की आंख के अनुसार तैयार किया गया था, जो उच्च सिलिंडर पावर और मोतियाबिंद दोनों समस्याओं का एक साथ समाधान करता है।

ऑपरेशन अत्यंत सफल रहा। सर्जरी के बाद श्री सुरेश कुमार बांका की आंख की रोशनी न सिर्फ वापस लौटी, बल्कि वे अब बिना चश्मे के भी सामान्य गतिविधियां करने में सक्षम हो गए हैं। मरीज ने बेहद खुशी व्यक्त करते हुए कहा, “मैं कई डॉक्टरों के पास गया था, सबने मना कर दिया था। डॉ. अभिषेक सर ने नई उम्मीद जगाई और सच में भगवान का रूप बनकर मेरी जिंदगी बदल दी।”

डॉ. अभिषेक को कोटि-कोटि नमन

इस उपलब्धि पर डॉ. अभिषेक ने कहा, “यह मेरे लिए और पूरी टीम के लिए गर्व का विषय है। झारखंड में पहली बार इतनी हाई पावर का कस्टमाइज्ड टॉरिक लेंस सफलतापूर्वक लगाया गया। आधुनिक नेत्र विज्ञान की बदौलत आज हम उन मरीजों को भी नई जिंदगी दे सकते हैं जिन्हें पहले नामुमकिन समझा जाता था।”

मीनाक्षी नेत्रालय के प्रबंधन ने भी इस सफलता पर पूरे स्टाफ को बधाई दी और कहा कि अस्पताल हमेशा से जटिल से जटिल केसों को संभालने और राज्य के मरीजों को विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

क्यों है यह उपलब्धि महत्वपूर्ण?

  • उच्च सिलिंडर पावर वाली आंखों में टॉरिक लेंस लगाना खुद में बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। -18 जैसी अत्यधिक पावर में तो यह और भी जटिल हो जाता है।
  • कस्टमाइज्ड स्मार्ट लेंस मरीज की आंख की ठीक आकृति और जरूरत के अनुसार बनाए जाते हैं, जिससे एस्ट्रिग्मैटिज्म (दृष्टि विकृति) को बेहतर तरीके से सुधारा जा सकता है।
  • झारखंड जैसे राज्य में ऐसी उन्नत सुविधा उपलब्ध होना स्थानीय मरीजों के लिए बड़ी राहत है, जिन्हें पहले दिल्ली, मुंबई या चेन्नई जैसे महानगरों का रुख करना पड़ता था।

यह सफलता न केवल डॉ. अभिषेक की कुशलता और मीनाक्षी नेत्रालय की उन्नत चिकित्सा व्यवस्था को दर्शाती है, बल्कि यह पूरे झारखंड के नेत्र रोगियों के लिए नई आशा का प्रतीक भी है।

डॉ. अभिषेक सर को उनकी इस उपलब्धि के लिए कोटि-कोटि नमन और हार्दिक अभिनंदन। आप जैसे समर्पित चिकित्सक ही सच्चे अर्थों में “दुनिया के दूसरे भगवान” कहलाने के योग्य हैं।

मीनाक्षी नेत्रालय की इस उपलब्धि की पूरे झारखंड में चर्चा हो रही है। ऐसे और कई जटिल केसों में अस्पताल की सफलताएं आने वाले समय में राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएंगी।

सुरेश कुमार बांका अब पूर्ण रूप से स्वस्थ और प्रसन्न हैं। उनकी कहानी उन हजारों मरीजों के लिए प्रेरणा बनेगी जो गंभीर नेत्र समस्याओं से जूझ रहे हैं।

मीनाक्षी नेत्रालय, रांची – आँखों का भरोसा, जीवन का उजाला।