विश्व कला दिवस के पूर्व संध्या पर रंगकर्मियों ने किया स्क्रिप्ट का लोकार्पण

विश्व कला दिवस के पूर्व संध्या पर रंगकर्मियों ने किया स्क्रिप्ट का लोकार्पण

प्रख्यात नाटककार चंदन सेन के बंगला नाटक दायबद्ध का हिंदी रूपांतरण है फिर मिलेंगे

प्रतिनिधि, मेदिनीनगर

मंगलवार की शाम को विश्व कला दिवस के पूर्व संध्या पर देश के जाने माने बंगला नाटककार चंदन सेन लिखित बहुचर्चित नाटक दायबद्ध का हिंदी रूपांतरण का लोकार्पण किया गया। पलामू के लोकप्रिय रंगकर्मी सैकत चटर्जी ने बंगला नाटक दायबद्ध का हिन्दी रूपांतरण किया है, जिसका नाम फिर मिलेंगे है। बंगला पुस्तकालय में आयोजित इस कार्यक्रम में सबसे पहले सरस्वती माता के चित्र के सामने नाटक के स्क्रिप्ट का पूजा किया गया। इसके बाद इसका लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में प्रसिद्ध कला समालोचक रवीन्द्र त्रिपाठी, लोकार्पणकर्ता के रूप में कवि लेखक रवि शंकर पांडेय, विशिष्ट अतिथि के रूप में कवि नवीन सहाय, लेखक प्रभात मिश्रा सुमन व वरीय रंगकर्मी प्रसिद्ध राम , आमंत्रित अतिथि के रूप में वंगीय दुर्गा बाड़ी पूजा असोसिएशन के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोराल व सचिव जयंत विश्वास मौजूद थे। सभी अतिथियों ने मिलकर स्क्रिप्ट का लोकार्पण किया। इस अवसर पर नाटककार चंदन सेन ने ऑनलाइन जुड़कर रंगकर्मियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि दायबद्ध नाटक एक बहुचर्चित नाटक है जिसे विदेशों में भी किया गया है। उस नाटक का हिंदी रूपांतरण सैकत चटर्जी के द्वारा बेहद खूबसूरती से किया गया है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि यह नाटक हिंदी पट्टी के दर्शकों के लिए भी सफल होगी। रविन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि मासूम आर्ट ग्रुप जिस तरह से रंगमंच को जीवित रखने के लिए कठिन कार्य कर रही है वह सराहनीय है। पलामू में रंगकर्म करने जैसा कठिन काम लगातार करते रहना ऐतिहासिक उपलब्धि है , इस कार्य का डॉक्यूमेंटेशन होना चाहिए। रवि शंकर पांडेय ने कहा कि पलामू की रंगमंच का इतिहास बहुत पुराना है, मासूम इसे ऊंचाई तक ले जाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नबीन सहाय ने कहा कि जब भी रंगमंच का इतिहास लिखा जाएगा उसके मासूम का नाम अग्रिम पंक्ति में रहेगा। प्रभात मिश्रा सुमन ने कहा कि किसी नाटक का रूपांतरण काफी कठिन काम है, अब इस नाटक का मंचन भी देखना है। प्रसेनजीत बोराल ने नाटक के प्रति बंगाली समाज की झुकाव का जिक्र करते हुए कहा कि हर हाल में मासूम आर्ट ग्रुप का सहयोग किया जायेगा। अतिथियों का स्वागत मुनमुन चक्रवर्ती, कनक लता तिर्की, कामरूप सिन्हा, उज्ज्वल सिन्हा के द्वारा किया गया। स्क्रिप्ट पूजा गुलशन मिश्रा की देखरेख में किया गया। कार्यकम का संचालन अविनाश तिवारी और धन्यवाद ज्ञापन देवेश मोइत्रा ने किया। कार्यकम को सफल बनाने में आदर्श ओपनडेज शहजादा तालिब , राज प्रतीक पाल, अमर भांजा, राहुल चंद्रवंशी, गिरेंद्र यादव , प्रकाश ठाकुर, श्यामली घोष आदि का सराहनीय योगदान रहा।

क्या है नाटक फिर मिलेंगे

सैकत चटर्जी ने बताया कि फिर मिलेंगे प्रसिद्ध नाटककार चंदन सेन द्वारा लिखित बंगला नाटक दायबद्ध का हिंदी रूपांतरण है। यह एक ट्रक ड्राइवर की जिंदगी की उतार चढ़ाव की कहानी है, जो जीवन में अपने रिश्तों की जवाबदेही को पूरी शिद्दत से निभाता है। उन्होंने कहा कि बंगला नाटक के दर्शकवर्ग के साथ हिंदी नाटक के दर्शकों के टेस्ट में फर्क है। रूपांतरण के दौरान उसका ध्यान रखा गया है। इस नाटक की प्रथम प्रस्तुति 9 जून को शिमला में ऑल इंडिया आर्टिस्ट असोसिएशन द्वारा आयोजित ऑल इंडिया ड्रामा कंपीटिशन में किया जाएगा।