राष्ट्रीय मंच पर चमका गुमला: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘जोहार रागी’ स्टॉल की सराहना की

राष्ट्रीय मंच पर चमका गुमला: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘जोहार रागी’ स्टॉल की सराहना की

● उन्नत कृषि महोत्सव में झारखंड के ‘जोहार रागी’ और ‘कस्तूरी मक्का’ बने आकर्षण का केंद्र, महिला उद्यमियों से किया संवाद
(रणधीर निधि)
गुमला – राष्ट्रीय स्तर के *‘उन्नत कृषि महोत्सव 2026 : प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण’ में झारखंड की पहचान उस समय और सशक्त हो गई, जब केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड के ‘जोहार रागी’ और ‘कस्तूरी मक्का’ स्टालों का अवलोकन किया।

दशहरा मैदान, रायसेन मध्य प्रदेश में आयोजित इस तीन दिवसीय महोत्सव के पहले दिन 11 अप्रैल को मंत्री ने प्रदर्शनी का दौरा करते हुए विशेष रूप से गुमला के रागी मिशन से जुड़े उत्पादों में गहरी रुचि दिखाई और वहां मौजूद महिला स्वयं सहायता समूहों तथा उद्यमियों से संवाद कर उनके अनुभवों को जाना।

गुमला के ‘जोहार रागी’ की राष्ट्रीय गूंज

मंत्री ने ‘जोहार रागी’ (रागी मिशन गुमला) को ग्रामीण नवाचार, पोषण और महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने रागी से बने बिस्कुट, आटा, लड्डू सहित विभिन्न मूल्यवर्धित उत्पादों की गुणवत्ता को परखा और इसकी ब्रांडिंग तथा बाजार विस्तार की सराहना की।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाते हैं, बल्कि देश में श्री अन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के अभियान को भी मजबूती प्रदान करते हैं।

‘कस्तूरी मक्का’ ने भी खींचा ध्यान

झारखंड के ‘कस्तूरी मक्का’ स्टाल पर भी केंद्रीय मंत्री ने समय बिताया और इसकी उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता तथा विपणन की जानकारी ली। उन्होंने इसे पोषण और कृषि विविधीकरण के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया।

गुमला की टीम ने बढ़ाया मान

इस राष्ट्रीय आयोजन में गुमला से भगवती देवी, सावित्री देवी, राहुल कुमार साहू और संदीप कुमार ने झारखंड का प्रतिनिधित्व किया। इन सभी ने मंत्री को रागी मिशन की पूरी यात्रा—शुरुआत से लेकर आज राष्ट्रीय पहचान बनने तक—की जानकारी दी।

महिला उद्यमियों ने बताया कि कैसे छोटे स्तर से शुरू हुआ यह प्रयास आज हजारों किसानों और सैकड़ों महिलाओं की आजीविका का मजबूत आधार बन चुका है।

महिला सशक्तिकरण का जीवंत मॉडल

केंद्रीय मंत्री ने विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणादायक है। उन्होंने इस पहल को “आत्मनिर्भर भारत” की अवधारणा का जमीनी रूप बताया।

झारखंड मॉडल बना राष्ट्रीय प्रेरणा

‘जोहार रागी’ और ‘कस्तूरी मक्का’ को राष्ट्रीय मंच पर मिली यह पहचान इस बात का प्रमाण है कि झारखंड जैसे राज्यों में भी पारंपरिक कृषि उत्पादों को आधुनिक तकनीक, ब्रांडिंग और बाजार से जोड़कर राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।

बहरहाल रायसेन के इस राष्ट्रीय मंच से गुमला की गूंज यह संदेश दे रही है कि गांवों की मेहनत, महिलाओं की भागीदारी और सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो स्थानीय उत्पाद भी देश की पहचान बन सकते हैं।