‘हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई मत, बस एक तिरंगा’ – कवि प्रशांत बजरंगी ने गढ़वा में जीता दिल”

हिंदू मुस्लिम सिक्ख इसाई मत बोलो, मुझको तो बस एक तिरंगा दिखता है…

होली के अवसर पर गढ़वा में हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन का आयोजन

गढ़वा : गढ़वा की अग्रणी साहित्यिक संस्था सृजन साहित्यिक मंच द्वारा होली के अवसर पर रविवार की शाम हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया. स्थानीय गोविंद उच्च विद्यालय के मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न शहरों के आये कवियों ने अलग-अलग विधाओं में अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं को भरपूर मनोरंजन प्रदान किया. कवि सम्मेलन की शुरूआत मिर्जापुर से आयी कवियित्री पूनम श्रीवास्तव ने मां सरस्वती की वंदना से की. तत्पश्चात उन्होंने श्र‍ृंगार रस के गीतों की सस्वर प्रस्तुति से श्रोताओं को झूमने के लिये मजबूर कर दिया. उन्होंने जब हुये प्यार के सिलसिले देख ले, मिट गये सारे शिकवे गिले देख ले… तथा उन्होंने अपनी दूसरी भोजपुरी रचना आग लागी त कुछ पल लहकबे करी, फूल कौनो रही पर महकबे करी…की प्रस्तुति कर खूब तालियां बटोरी. इसके पश्चात सीतामढ़ी से आये कवि प्रशांत बजरंगी ने अपनी देशभक्ति की ओजपूर्ण रचना सड़क किनारे भूखा नंगा दिखता है मंदिर-मस्जिद खातिर दंगा दिखता है, हिंदू-मुस्लिम सिख इसाई मत बोलो मुझे तो बस एक तिरंगा दिखता है…सुनाकर लोगों को झकझोरने का प्रयास किया. साथ ही उन्होंने इसके अलावे कई अन्य देशभक्ति और संस्कृति पर आधारित रचनाओं की प्रस्तुति से श्रोताओं को खूब प्रभावित किया. बनारस से आये सुप्रसिद्ध गीतकार मनोज मधुर ने भउजी ओरा जाइल बाटे फगुनवा… व जब पछुआ बहा रहा पंत, लगता है वसंत आ गया…आदि गीत की प्रस्तुति से श्रृंगार की पूरा वातावरण बनाने का प्रयास किया. मंच का संचालन कर रहे भभुआ से आये शंकर कैमूरी ने बीच-बीच में अपनी रचनाओं से श्रोताओं को लोट-पोट कर डाला. उन्होंने गर्मिला-सर्दिला मौसम बीत गया बर्फिला मौसम, आया रंग-रंगीला मौसम होली का…और पियरी बलिया तर ताज धरे गेहूंआ गदराइल…आदि की प्रस्तुति कर प्रकृति का सुंदर चित्रण प्रस्तुत किया. मंच पर उतर प्रदेश के मउ से आये कवि पंकज प्रखर ने अपनी ओजपूर्ण रचनाओं से सबको खूब प्रभावित किया. स्थानीय कवि संजय चौबे और दयाशंकर तिवारी ने भी होली गायन के माध्यम से कार्यक्रम में रंग भरने का काम किया. श्रोताओं ने कवि सम्मेलन का आनंद देर रात तक उठाया.

सृजन साहित्यिक मंच ने गढ़वा में साहित्यिक वातावरण बनाया है : दिनेश सिंह

हास्य-व्यंग्य कवि सम्मेलन की उदघाटन मुख्य अतिथि बाबू दिनेश सिंह विवि के कुलाधिपति दिनेश प्रसाद सिंह, गढ़वा एसडीओ संजय कुमार, समाजसेवी राकेश पाल, रेडक्रॉस सोसाईटी के अध्यक्ष डॉ मुरली प्रसाद गुप्ता, जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष भृगुनाथ चौबे, मंच के सलाहकार सुरेंद्र कुमार मिश्र आदि ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर एवं मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन करके किया. इस अवसर पर कुलाधिपति दिनेश प्रसाद सिंह ने सृजन साहित्यिक मंच के इस प्रयास की काफी सराहना की. उन्होंने कहा कि गढ़वा में सृजन साहित्यिक मंच ने साहित्य का अच्छा वातावरण बनाने का काम किया. यह आज के समाज के लिये बहुत आवश्यक है. गढ़वा एसडीओ संजय कुमार ने कहा कि गढ़वा में उन्हें अच्छा साहित्यिक वातावरण देख्रने को मिलता है और इसका श्रेय सृजन साहित्यिक मंच को जाता है. उन्होंने कहा कि कवि सम्मेलन के माध्यम से समाज को एक नई दिशा मिलेगी. कार्यक्रम में उपस्थित गढ़वा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी, पूर्व सांसद घुरन राम, गढ़वा नगर परिषद के नवनिर्वाचित अध्यक्ष दौलत सोनी सहित, समाजवेवी विजय केसरी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओबैदुल्लाह हक अंसारी, अमृत शुक्ला, सुशील केसरी, कमलेश गुप्ता, मनोज केसरी सहित काफी संख्या में विशिष्ट अतिथियों ने देर रात तक उपस्थित होकर कवि संम्मेलन का आनंद लिया. कवि सम्मेलन के पूर्व मंच के सचिव सतीश कुमार मिश्र ने अपने शहरनामा की प्रस्तुति से शहर की समस्याओं को व्यंग्यपूर्ण शैली में उठाने का प्रयास किया. सम्मेलन में सभी अतिथियों का स्वागत व विषय प्रवेश अध्यक्ष विनोद पाठक ने तथा संचालन अधिवक्ता राकेश त्रिपाठी ने तथा धन्यवादज्ञापन संरक्षक रासबिहारी तिवारी ने किया. कार्यक्रम में मंच के मीडिया प्रभारी दयाशंकर गुप्त को विशेष रूप से सम्मानित किया गया. कार्यक्रम को सफल बनाने में संगठन सचिव राजकुमार मधेशिया, कोषाध्यक्ष प्रमोद कुमार, रामाशंकर चौबे, राजकिशोर राय आदि ने सक्रिय भूमिका निभायी.