धनुषकोडी: पौराणिक और प्राकृतिक महत्व का संगम*
रामेश्वरम, तमिलनाडु: धनुषकोडी, रामेश्वरम द्वीप के दक्षिण-पूर्वी सिरे पर स्थित, एक ऐसा स्थान है जहां पौराणिक कथाएं और प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा मेल देखने को मिलता है। रामायण के अनुसार, भगवान राम ने अपने धनुष से राम सेतु को तोड़ा या चिह्नित किया, जिससे इस स्थान का नाम “धनुषकोडी” पड़ा। “धनुष” अर्थात धनुष और “कोडी” अर्थात सिरा। यह स्थान हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी के पवित्र संगम पर स्थित है, जो श्राद्ध और पितृकर्म के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
हिंद महासागर, विश्व का तीसरा सबसे बड़ा महासागर, भारत के नाम पर है और 7.06 करोड़ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है। वहीं, बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर का हिस्सा, विश्व की सबसे बड़ी खाड़ी है, जिसका नाम पश्चिम बंगाल से प्रेरित है। धनुषकोडी में इन दोनों जलराशियों का मिलन इसे धार्मिक और प्राकृतिक रूप से खास बनाता है।
1964 के रामेश्वरम चक्रवात ने धनुषकोडी को तबाह कर “भूतिया शहर” बना दिया, लेकिन आज भी इसके खंडहर, प्राकृतिक सौंदर्य और राम सेतु के दर्शन पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते हैं। यह स्थान भारत-श्रीलंका के बीच पाक जलसंधि में केवल 50 गज की दूरी पर स्थित है, जो इसे भौगोलिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाता है।

