पलामू: हफ्ते में दो दिन खुलता स्कूल, मिड-डे मील में सिर्फ भुजिया-चावल
सरकारी स्कूल में हफ्ते में केवल दो दिन पढ़ाई, मिड-डे मील में भुजिया, चावल और दाल – शिक्षा और पोषण पर सवाल**
पलामू जिले के सतबरवा प्रखंड अंतर्गत धावाड़ीह पंचायत के टोला बरहकुरवा उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय में शिक्षा और मिड-डे मील योजना की बदहाल स्थिति ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों के अनुसार, यहाँ स्कूल सप्ताह में मात्र दो दिन संचालित होता है, और बच्चों को मिड-डे मील के नाम पर केवल भुजिया, चावल और दाल परोसा जाता है। इस स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के पोषण पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह स्कूल ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है, जहाँ पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं। स्कूल उनके लिए शिक्षा के साथ-साथ पोषण का प्रमुख साधन है। लेकिन, सीमित स्कूल संचालन और भोजन में विविधता की कमी बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर रही है। अभिभावकों में इस स्थिति को लेकर गहरी नाराजगी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्कूल के प्रधानाध्यापक बिंदेश्वर सिंह अक्सर रांची में मीटिंग या ट्रेनिंग का हवाला देकर स्कूल से अनुपस्थित रहते हैं। जब स्कूल खुलता भी है, तो वे कथित तौर पर मोबाइल पर समय बिताते हैं, जिससे पठन-पाठन पूरी तरह ठप है। एक अभिभावक ने बताया, “हमारे बच्चे स्कूल के बजाय खेतों में ज्यादा समय बिता रहे हैं, क्योंकि स्कूल हफ्ते में सिर्फ दो दिन खुलता है।”
झारखंड में मिड-डे मील योजना के तहत स्कूलों में पोषणयुक्त भोजन देने का प्रावधान है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने फोर्टिफाइड चावल और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। बावजूद इसके, इस स्कूल में भोजन की गुणवत्ता और विविधता मानकों से कोसों दूर है।
सीमित स्कूल संचालन के कारण बच्चों की शिक्षा भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अभिभावकों का कहना है कि अनियमित कक्षाओं के चलते बच्चे बुनियादी शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, जो उनके भविष्य के लिए चिंताजनक है।
स्थानीय समुदाय ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से इस मामले की जाँच और तत्काल सुधार की माँग की है। यह स्थिति न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग का भी गंभीर उदाहरण है।

