वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भारतीय चैंबर प्रतिनिधियों की उच्चस्तरीय बैठक, एससी-एसटी और महिला उद्यमिता को मिलेगा नया बल

नई दिल्ली: श्री सुबीर पॉल, राष्ट्रीय अध्यक्ष भारतीय चैंबर ऑफ कॉमर्स फॉर एससी, एसटी और महिला उद्यमियों, एवं सुश्री सीमा किरण, राष्ट्रीय संयुक्त सचिव (प्रशासन) ने केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में एससी, एसटी, अल्पसंख्यक और महिला उद्यमियों के लिए एमएसएमई सेक्टर में आर्थिक विकास को तेज करने पर चर्चा हुई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग समन्वय को मजबूत करना और एससी-एसटी उद्यमियों के लिए वित्त तक पहुंच में सुधार करना था। साथ ही, समावेशी विकास के लिए महत्वपूर्ण पहलों, नीति समर्थन, जमीनी स्तर पर आ रही गिरवी संबंधी समस्याओं और क्षमता निर्माण पर भी विस्तार से विचार किया गया। ये उपाय एमएसएमई इकोसिस्टम के भीतर नए और मौजूदा अवसरों को बढ़ावा देने के लिए जरूरी हैं।

इस संदर्भ में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2025 में अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की पांच लाख महिलाओं के लिए एक नई योजना की घोषणा की, जिसके तहत पहली बार उद्यमी बनने वाली महिलाओं को अगले पांच वर्षों में 2 करोड़ रुपये तक का टर्म लोन दिया जाएगा। इस योजना में स्टैंडअप इंडिया स्कीम की सफलता को भी शामिल किया गया है, ताकि महिलाओं को बिजनेस को ऑनलाइन विकसित करने, प्रबंधन कौशल बढ़ाने के लिए वर्कशॉप और मेंटरशिप प्रदान की जा सके।

सरकार का लक्ष्य है कि अत्यधिक श्रमबल वाले क्षेत्रों में रोजगार के अवसर और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए। इसके तहत, डिजिटल ट्रेनिंग, मार्केटिंग सपोर्ट और सरकारी योजनाओं से जुड़ने की सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इस पहल से न केवल महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण होगा बल्कि सामाजिक और आर्थिक समानता भी सुनिश्चित होगी।

इसके अलावा, वित्त मंत्री ने बताया कि अप्रैल 2022 से मार्च 2025 तक स्टैंडअप इंडिया योजना के तहत एससी, एसटी और महिलाओं को लगभग 29,000 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जो इस वर्ग के उद्यमियों को वित्तीय सहायता और संस्थागत समर्थन प्रदान करने में मददगार साबित हुए हैं।

इस बैठक और संबंधित सरकारी पहलों के जरिए एससी, एसटी, अल्पसंख्यक और महिला उद्यमियों को एमएसएमई सेक्टर में मजबूत आर्थिक भागीदारी और बेहतर वित्तीय समावेशन प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे उनके व्यवसायों को बढ़ावा मिले और समग्र आर्थिक विकास को गति मिले