झाड़ियों के बीच जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे

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झाड़ियों के बीच जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चे

महुआडांड़ सरकारी स्कूल में स्टूडेंट को आधुनिक सुविधाएं देने के सरकारी दावे तो खूब किए जाते हैं।लेकिन लातेहार जिले के मध्य विद्यालय अंबाकोना,पंचायत ओरसा महुआडांड़ में संचालित हो रहे स्कूलों में बच्चे आज भी बुनियादी जरुरतों के लिए भी तरस रहे हैं। यहां के बच्चे जर्जर स्कूल भवन के कारण बांस और लकड़ी से बने मड़ई में बैठकर पढ़ने को विवश हैं। इस स्कूलों में बच्चे आज भी जमीन पर बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। इन नौनिहालों को दूसरी सुविधाओं जैसे लाइब्रेरी, कंप्यूटर क्लास, प्रयोगशाला की बात तो छोड़ दीजिए बैठने के लिए एक अदद बेंच तक उपलब्ध नहीं है।पारा शिक्षक ज्योति एक्का ने बताया कि तीन साल पहले विद्यालय मरम्मत के लिए फंड आया था।लेकिन मरम्मत करने बाद भी स्कूल के छत से पानी की बूंद टपक रही है । स्कूल का छात्र अत्यंत जर्जर हो गया है जिसके कारण बास का टेंट लगाकर बच्चो का पढाई कराया जाता है।इस संबंध में शिक्षक झगर नागेशिया ने बताया कई बार विभाग को इसकी लिखित सूचना देने पर भी को कारवाई नहीं हुई। बार बार विभाग को कहते थक चुके है।प्रखंड मुख्यालय से स्कूल की दूरी 18 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ बॉर्डर से सटा हुआ है।स्कूल जाने के लिए जर्जर सड़क है ।झाड़ी के बीच स्कूली बच्चे पढाई करते है।खुला जगह होने के साथ-साथ पठार क्षेत्र होने से बच्चों काफी ठंड लगती है।
साथ ही इस विद्यालय के माध्यम भोजन बनाने के लिए भी दूसरे के घर जाकर खाना बनाना पड़ता है।वही पीने के पानी की गंभीर समस्या है।चुआड़ी से पानी लाकर माध्यम भोजन सहित अन्य कार्य होते है।

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